नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश चुनाव में लखनऊ की दो विधान सभा सीटें बेहद चर्चा में हैं। पहली तो सरोजनी नगर दूसरी कैंट सीट। लेकिन जब भाजपा ने प्रत्याशियों के ऐलान किए तो सभी को चौंका दिया। सरोजनी नगर सीट से मंत्री स्वाति सिंह का टिकट कट गया, वहीं उनके पति दयाशंकर सिंह का भी इंतजार लंबा हो गया। इसी तरह बेटे को टिकट देने के लिए राजनीति से संन्यास लेने तक की बात कहने वाली रीता बहुगुणा जोशी के हाथ में भी कुछ नहीं आया। साफ है भाजपा ने दबाव की राजनीति को तरजीह न देकर नए उम्मीदवारों पर दांव लगाया है। इसी तरह मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव को भी लखनऊ कैंट से टिकट नहीं मिला।
विवाद से बिगड़ा पति-पत्नी का खेल ?
सरोजनी नगर सीट से मंत्री स्वाति सिंह विधायक थी। और वह यहां से दोबारा टिकट लेने की उम्मीद लगाई हुईं थी। लेकिन उसी सीट से उनके पति और भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने दावेदारी ठोक दी थी। और उसके बाद सरोजनी नगर सीट राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई। इसके अलावा मंत्री स्वाति सिंह का कथित ऑडियो टेप वायरल होने के बाद स्थिति बिगड़ गई। टेप में उन पर पति द्वारा मारपीट की बात थी। सूत्रों के अनुसार यह सब बातें, स्वाति सिंह और दयाशंकर सिंह के खिलाफ गई। इसलिए उनका टिकट कट गया। हालांकि अभी ऐसी चर्चा है कि दयाशंकर सिंह को बलिया से टिकट दिया जा सकता है। दयाशंकर सिंह बलिया के ही रहने वाले हैं। इसके अलावा मंत्री के रूप में पिछले 5 साल में उनका असंयत व्यवहार भी उनके खिलाफ गया।
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संन्यास से नहीं बनीं बात
लखनऊ कैंट से पूर्व विधायक और सांसद रीता बहुगुणा जोशी का पुत्र मोह भी भारी पड़ गया। उन्होंने अपने पुत्र का राजनीतिक करियर बनाने के लिए यहां तक संदेश दे दिया था कि अगर उनके पुत्र को पार्टी टिकट देगी तो वह राजनीति से संन्यास ले लेगी। हालांकि उनका यह दांव भी बेकार गया। उनकी पाला बदलने की भी चर्चा थी। सूत्रों के अनुसार स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी बेटी संघ मित्रा मौर्य की स्थिति (पिता सपा में बेटी भाजपा में) को देखते हुए पार्टी बहुगुणा के बेटे को टिकट देने के लिए तैयार है लेकिन उसके लिए शर्त यह है कि वह भाजपा से इस्तीफा देकर पार्टी ज्वाइन करें। लेकिन रीता बहुगुणा जोशी इस पर फिलहाल फैसला नहीं ले पाईं। लेकिन अब बेटे का टिकट कटने के बाद शायद उनकी दुविधा खत्म हो गई हो।
अपर्णा यादव का क्या होगा
लखनऊ कैंट सीट से 2017 का चुनाव सपा के टिकट पर मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव चुनाव लड़ी थी। और इस बार वह चुनाव के ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गई। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही थी कि भाजपा उन्हें कैंट सीट से टिकट देगी। लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं मिला है। सूत्रों के अनुसार अपर्णा यादव ने जब भाजपा ज्वाइन किया था तो उन्हें कैंट से टिकट देने की कोई डील नहीं हुई थी। लेकिन भाजपा उन्हें दूसरे मौके दे सकती है।
नए उम्मीदवारों से क्या साधे समीकरण
भाजपा ने स्वाति सिंह की सीट सरोजनी नगर से ईडी के पूर्व अधिकारी राजेश्वर सिंह को टिकट दिया है। राजेश्वर सिंह ने हाल ही में वीआरएस लेकर राजनीतिक पारी शुरू की है। जबकि कैंट सीट से मंत्री ब्रजेश पाठक को टिकट दिया है। जो कि लखनऊ मध्य सीट से विधायक है। जबकि कैंट सीट से मौजूदा विधायक सुरेश तिवारी का टिकट काट दिया गया है। साफ है कि पार्टी ने उम्मीदवार जरूर बदले है लेकिन जातिगत समीकरण साध कर रखा है। स्वाति सिंह की जगह राजेश्वर सिंह और सुरेश तिवारी की जगह ब्रजेश पाठक को टिकट देकर ब्राह्मण और ठाकुर वोटरों को साधने की कोशिश की गई है। साथ ही यह भी संदेश दे दिया है कि अनुशासनहीनता और दबाव की राजनीति नहीं चलेगी।