- चीन 2013 से 2018 तक भारत का सबसे बड़ा ट्रे़ड पार्टनर था।
- डोकलाम और गलवान विवाद ने भारत-चीन के रिश्तों में बनाई दूरी।
- क्वॉड, IPEF और मुक्त व्यापार समझौते के जरिए भारत पश्चिमी देशों के साथ मजबूत कर रहा है रिश्ते
USA Become the largest trade partner of India : हाल ही में हुए क्वॉड सम्मेलन (Quad Summit) में जिस तरह भारत-अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया ने चीन को आड़े हाथ लिया था। उससे बौखलाए चीन को एक और झटका लगा है। भारत के साथ द्विपक्षीय कारोबार के मामले में अमेरिका ने एक बार फिर चीन को पीछे छोड़ दिया है। चीन के लिए यह इसलिए भी बड़ा झटका है कि वह 2013 से 2018 तक भारत का सबसे बड़ा ट्रे़ड पार्टनर था। लेकिन उसके बाद से चीन की तुलना में अमेरिका तेजी से भारत का बड़ा ट्रेड पार्टनर बनता जा रहा है। जिसका असर है कि 2021-22 में वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और भारत का द्विपक्षीय व्यापार (India-US Bilateral Trade) करीब 40 अरब डॉलर बढ़कर 119.42 अरब डॉलर पर पहुंच गया। साल 2020-21 में दोनों देशों के बीच 80.51 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था।
डोकलाम और गलवान विवाद से बनी दूरी !
भारत (India) और चीन (China) के बीच के द्विपक्षीय व्यापार को देखा जाय तो जो चीन 2017-18 तक लगातार 5 साल से भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर था। लेकिन उसके बाद अगले तीन साल यानी 2020-21 तक द्विपक्षीय व्यापार में स्थिरता आ गई थी। इन तीन वर्षों में चीन के साथ भारत का द्विपक्षीय 81 से 87 अरब डॉलर के बीच ही रहा है। और अगर इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों को देख जाय, तो 2017 में डोकलाम विवाद और 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हुए विवाद के बाद वह सामान्य नहीं रहे हैं। दोनों देशों के बिगड़ते रिश्ते का ही असर था कि भारत सरकार ने सुरक्षा खतरे को देखते हुए साल 2020 में डिजिटल स्ट्राइक करते हुए चीन के 270 ऐप्स पर प्रतिबंध लगाए गए थे और उसके बाद ऐसी खबरें है कि फरवरी 2022 में 54 ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
भारत के साथ चीन का व्यापार | |
साल | द्विपक्षीय व्यापार (अरब डॉलर) |
2017-18 | 89 |
2018-19 | 87 |
2019-20 | 81 |
2020-21 | 86 |
2021-22 | 115 |
बदले रिश्तों का ही असर था कि अमेरिका 2018-19 और 2019-20 में चीन को पछाड़कर भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन गया था। लेकिन 2020-21 में स्थितियां बदली और चीन फिर से अमेरिका को पछाड़कर भारत का सबसे बड़ा ट्रेन पार्टनर बना। हालांकि चीन के साथ कारोबार में भारत ज्यादा उस पर निर्भर है। यानी चीन को निर्यात की तुलना में भारत उससे ज्यादा आयात करता है। इसीलिए भारत का व्यापार घाटा 72 अरब डॉलर का है। जबकि अमेरिका से भारत का 32 अरब डॉलर से ज्यादा का ट्रेड सरप्लस है।
कोविड-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध से बिगड़ी सप्लाई चेन
2019 में चीन में पहला कोविड-19 केस मिलने और उसके बाद पूरी दुनिया में मची तबाही ने न केवल आर्थिक मंदी की और दुनिया को बढ़ा दिया। बल्कि ग्लोबल बिजनेस की कई प्रैक्टिस भी बदल गई। इसका सबसे ज्यादा असर पूरी दुनिया में सप्लाई चेन को लेकर हुआ है। जिसमें पश्चिम देशों को सबसे ज्यादा चीन से झटका लगा है। और इसके बाद रही सही कसर रूस-यूक्रेन युद्ध ने कर दी है। इसके बाद से अब दुनिया भर के देश नए सिरे से सप्लाई चेन को बनाने में लगे हुए है। इस बीच चीन की सख्त जीरो कोविड-19 नीति ने सप्लाई चेन को और बिगाड़ दिया है। जिसकी वजह से नए कारोबारी समीकरण भी बन रहे हैं। हाल ही क्वॉड में अमेरिका द्वारा 13 देशों के साथ मिलकर इंडो पेसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) का ऐलान इसी कवायद की घोषणा है। खास बात यह है कि IPEF से चीन को दूर रखा गया है। जबकि IPEF के 13 में से 10 देश एशिया के हैं।
भारत बना रहा है नए मौके
बदलती भू-राजनीतिक (Geo Political)परिस्थितियों को देखते हुए भारत भी नए सिरे से कारोबारी रिश्ते बना रहा है। इसी का परिणाम है कि क्वॉड देशों में भागीदारी के साथ-साथ भारत IPEF का सदस्य बना है। इस समूह में अमेरिका ,भारत, ऑस्ट्रेलिया,जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, ब्रुनेई, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम शामिल हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान से भारत की रणनीति साफ समझ आती है। जिसमें भारत, आने वाले पारदर्शी, भरोसेमंद और लचीली सप्लाई चेन चाहता है। क्योंकि सप्लाई चेन टूटने का असर रिकॉर्ड महंगाई में भी दिखा है। प्रधानमंत्री ने कहा है IPEF दुनिया के आर्थिक विकास का इंजन बनेगा। भारत हमेशा मुक्त, खुला और समावेशी इंडो पेसिफिक क्षेत्र को लेकर प्रतिबद्ध रहा है।विश्वास, पारदर्शिता और सामयिकता हमारे बीच लचीली सप्लाई चेन के तीन मुख्य आधार होने चाहिए।
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इसी तरह अभी अप्रैल में भारत ने लंबे समय से अटके ऑस्ट्रेलिया (Australia) के साथ मुक्त व्यापार (Free Trade Agreement) समझौते को हरी झंडी दे दी है। दोनों देशों के बीच अभी 25 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। मुक्त व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के बीच कारोबार में तेजी आने की संभावना है। और अब जल्द ही भारत ब्रिटेन के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता (FTA) करने की तैयारी में हैं। हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा है कि दोनों देशों के बीच दिपावली में मुक्त व्यापार समझौता हो सकता है।