- आधार से वोटर आई डी को लिंक करना ऑप्शनल होगा।
- पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी के अनुसार आधार से वोटर आईडी लिंक होने से डाटा प्राइवेसी का मौटे तर पर खतरा नहीं दिखता है।
- डुप्लीकेसी और फर्जी वोटिंग पर लगाम लगेगी, लेकिन प्रवासी श्रमिकों को फायदा देने के लिए कानून में बदलाव करना होगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वोटर आईडी कार्ड को आधार से लिंक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। दावा है कि इसके जरिए डुप्लीकेसी रूकेगी और फर्जी वोटिंग पर भी लगाम लगेगी। आधार को लिंक करने की प्रक्रिया, चुनाव आयोग ने साल 2015 में शुरू में की थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए इस पर रोक लगा दी थी। अब कैबिनेट ने नए सिरे से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। जिसके आधार पर कानून में संशोधन भी किया जाएगा। सरकार के फैसले पर टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई.कुरैशी से बात की है। पेश है उसके प्रमुख अंश:
क्या डुप्लीकेट वोटर की समस्या खत्म होगी
वर्षों से चुनाव आयोग डुप्लीकेट वोटर की समस्या से जूझ रहा है। ऐसी सूरत में आधार के जरिए डुप्लीकेट वोटर की पहचान हो सकेगी और सिस्टम को साफ करना आसान हो जाएगा। क्योंकि देश में बड़े पैमाने पर बोगस वोटर है। मेरे कार्यकाल में डुप्लीकेसी रोकने के लिए ,वोटर को यह प्रावधान दिया गया कि अगर उसके पास दो जगहों पर वोटर आईडी है तो वह आयोग को सूचना देकर एक जगह की वोटर आईडी को निरस्त करा सकता है। वोटर को यह भी समझना चाहिए कि दो जगह वोटिंग करना अपराध है।
ऑप्शनल सिस्टम क्यों रखा
वोटर आई को आधार से लिंक करना ऑप्शनल होगा। अब इसके तहत यह समझना होगा कि ये ऑप्शन कैसे इस्तेमाल होगा। क्योंकि अभी यह नहीं पता है कि वोटर आईडी कार्ड धारक के पास विकल्प आएगा या फिर यह प्रक्रिया खुद चुनाव आयोग करेगा। अगर चुनाव आयोग इसको करता है तो देश में करीब 90 करोड़ वोटर है। उसे बहुत लंबी प्रक्रिया अपनानी होगी। मुझे समझ में नहीं आता है कि ऑप्शनल की प्रक्रिया कैसे पूरी की जाएगी।
क्या प्रवासी श्रमिकों को फायदा मिलेगा
आधार आईडी स्थायी होती है। जबकि वोटर आईडी अस्थायी होती है। क्योंकि मौजूदा कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति अपना निवास बदलता है और छह महीने तक उस जगह रहता है, तो वह नए निवास स्थान के आधार पर वोटर आईडी बनवा सकता है। अगर आधार के प्रमाण पर वोट देने का विकल्प आएगा, तो इसके लिए मौजूदा कानून में बदलाव करना होगा। ऐसा होने के बाद प्रवासी श्रमिकों को स्थान बदलने पर भी वोट देने का मौका मिल सकता है। इसके लिए हमें कानूनी प्रक्रिया का इंतजार करना होगा।
डर क्या
मुझे तो समझ में नहीं आता है कि आधार को वोटर आईडी से लिंक करने में डर क्या है। हो सकता है कोई खास वजह हो लेकिन मोटे तौर पर मुझे कोई दिक्कत नहीं दिखती है। इसके अलावा वोटर आई डी में नाम, पता, जन्म तिथि और पिता का नाम दर्ज होता है। जो कि पहले से ही सार्वजनिक है। ऐसे में डरने की कोई जरुरत नहीं है।