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- बिहार में जीतनराम मांझी और मुकेश साहनी की मुलाकात से कयासबाजी शुरू
- मांझी ने मुलाकात को बताया समान्य मुद्दों को लेकर हुई मुलाकात
- मांझी ने कुछ दिन पहले ही ट्वीट कर पीएम मोदी पर साधा था निशाना
पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर कयासों का दौर शुरू हो गया है। ये कयासों का दौर यूं ही शुरू नहीं हुआ है बल्कि इसके पीछे हैं सरकार में शामिल दो प्रमुख दलों के नेताओं की अलग से हुई बैठक। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के मुखिया जीतनराम मांझी के बीच अचानक हुई मुलाकात के बाद कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। दोनों ही नहीं अपने-अपने दलों के मुखिया हैं और मुकेश साहनी तो सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं।
मुलाकात के मायने
मांझी ने ट्वीट करते हुए इस मुलाकात को एक सामान्य मुलाकात बताया। उन्होंने मुलाकात की तस्वीर ट्वीटर पर साझा करते हुए कहा, 'आज पटना स्थित अपने आवास पर पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल को बढ़ाए जाने सहित अन्य मुद्दों को लेकर बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी जी से विमर्श हुआ।' हालांकि दोनों नेताओं के बीच में क्या चर्चा हुई इसे लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं।
मांझी ने नाम लिए बगैर पीएम पर साधा था निशाना
कुछ दिन पहले ही जीतनराम मांझी ने नाम लिए बगैर पीएम मोदी पर निशाना साधा था। मांझी ने ट्वीट कर कहा है कि वैक्सीन के सर्टिफिकेट पर यदि तस्वीर लगाने का इतना ही शौक है तो कोरोना से हो रही मृत्यु के डेथ सर्टिफिकेट पर भी तस्वीर लगाई जाए। यही न्याय संगत होगा। उन्होंने कहा था कि देश में संवैधानिक संस्थाओं के सर्वेसर्वा राष्ट्रपति हैं। इस नाते उसमें राष्ट्रपति की तस्वीर होनी चाहिए। मांझी के इस हमले पर बीजेपी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
समझिए गणित
बिहार सरकार कोरोना के मामलों को लेकर लगातार विपक्ष के निशाने पर है। विश्लेषकों की मानें तो मांझी जिस तरह लगातार हमले कर रहे हैं और भाजपा चुप्पी साधे हुए हैं उसकी भी अपनी एक वजह है। दरअसल मांझी एनडीए में एक बड़ा दलित चेहरा माने जाते हैं और कई हिस्सों में उनकी अच्छी पकड़ है। मांझी की पार्टी के चार विधायक इस विधानसभा में हैं। वहीं दूसरी तरफ मुकेश साहनी हैं जो विकासशील इंसान पार्टी के मुखिया हैं जिनके पास चार विधायक हैं। बिहार में बहुमत का आंकड़ा है 122 और एनडीए गठबंधन के पास इस समय 125 विधायक हैं। अगर दोनों दलों में से कोई भी इधर-उधर जाता है तो हालात बिल्कुल जुदा हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में कोई भी मांझी पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।